इस वक्त भारत में चुनाव का माहौल है और सबसे चर्चित प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर जी है आपको बता दें की प्रज्ञा ठाकुर जी भाजपा प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समक्ष भोपाल से चुनाव लड़ रही हैं !
भारत में 25 वर्ष की आयु से ऊपर का कोई भी व्यक्ति जो किसी गंभीर आरोप में अदालत द्वारा दोषी करार ना दिया गया हो और सजायाफ्ता ना रहा हो, वो चुनाव लड़ सकता है!
फिर ऐसा क्या हो गया है,इसमें ऐसी क्या विशेष बात है, क्यों कहर बरपा है प्रज्ञा ठाकुर जी के चुनाव लड़ने पर!
आपको बता दें की कांग्रेस के कुछ तथाकथित नामी-गिरामी नेताओं के द्वारा जो हिंदू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद की थ्योरी को जन्म दिया गया है उसकी सबसे पहली शिकार प्रज्ञा ठाकुर जी ही हैं
आइए जानते हैं आखिरकार प्रज्ञा ठाकुर जी के ऊपर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्यों लगाए गए है..!
महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक और भीकू चौक के बीच 29 सितंबर 2008 की रात एक बम धमाका हुआ जिसमें छह लोग मारे गए और करीब 100 लोग घायल हुए थे इसी बम विस्फोट के षडयंत्र रचना के आरोप में महाराष्ट्र एटीएस ने वास्तविकता में 8 अक्टूबर को और 23 अक्टूबर 2008 को (पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार )
साध्वी प्रज्ञा सिंह, कर्नल पुरोहित, अजय राहीरकर, राकेश धावडे और जगदीश म्हात्रे को गिरफ्तार किया गया था!
साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जी, जिन्हें सन् 2008 से आजतक लगभग नौ वर्षों तक जेल में अमानवीय यातनाएँ देने के बावजूद अदालत में दोषी साबित नहीं किया जा सका और आखिरकार एन आई ए ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है...! ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बीते 9 वर्षों में महाराष्ट्र एटीएस उनके खिलाफ चार्जशीट तक दायर नहीं कर पाई है जबकि 2008 से 2014 तक कांग्रेस का ही शासन काल रहा है!
प्रज्ञा ठाकुर जी इस वक्त बेल पर बाहर है और भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं!
अब बात आती है मुद्दे की कि उनके चुनाव लड़ने में विपक्षी दलों को तकलीफ क्यों है क्योंकि जहाँ एक तरफ उनकी हिंदू आतंकवाद/भगवा आतंकवाद थ्योरी फेल हो गई है वहीं दूसरी तरफ उन हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के जनक दिग्विजय सिंह को पता है कि अब जनता उनके इन कुकर्मों का हिसाब लेगी और यही कारण है कि दिग्गी की डर के मारे घिग्घी बँध गई है !
आइए इस केस की सच्चाई को तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं-
1. प्रज्ञा ठाकुर को 8 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया जबकि पुलिस रिकॉर्ड में 23 अक्टूबर बताया गया है !
2. तेरह दिनों तक पुलिस ने गैरकानूनी रूप से एक काल कोठरी में प्रज्ञा ठाकुर को क्यों रख?
3. किसी भी अपराधी को हिरासत में लेने के बाद 24 घंटे के अंदर अदालत के सामने पेश करना तथा 48 घंटे के अंदर मेडिकल करवाना आवश्यक है तो फिर साध्वी के केस में ऐसा क्यों नहीं किया गया क्या यह कानूनन अपराध नहीं है?
4. क्या एक महिला को जिसका अपराध 9 वर्षों में भी सिद्ध नहीं हो पाया उसे पुरुष पुलिसकर्मी द्वारा बेल्टों से पीटना शारीरिक वह मानसिक प्रताड़ना देना, अमानवीय अत्याचार करना कानूनन अपराध नहीं है..?
5. हेमंत करकरे दिग्विजय सिंह की निर्देशों का पालन कर रहे थे और उन्हीं के कहने पर उन्होंने साध्वी को बेइंतहा टॉर्चर किया क्योंकि जब हेमंत करकरे महाराष्ट्र एटीएस के अधिकारी थे और जैसा कि दिग्विजय सिंह ने कहा कि करकरे की उनसे रोज बात होती थी तो यह विचारणीय है कि किस कारणवश मध्य प्रदेश के दिग्विजय सिंह की महाराष्ट्र के एक आईपीएस अधिकारी से रोज बात हुआ करती थी ?
6. जिन साध्वी पर आतंकवादी हमले के षडयंत्र का आरोप लगाया गया उनका तीन बार नार्को टेस्ट,तीन बार ब्रेन मैपिंग टेस्ट और तीन बार पॉलीग्राफी टेस्ट करवाया गया और फिर भी उन्हें दोषी साबित नहीं कर सके क्योंकि वह दोषी थी ही नहीं..परंतु हाँ इसका एक दुष्परिणाम जरूर हुआ कि इनमें दिए गए केमिकल्स के कारण उन्हें कैंसर जैसी बीमारी का सामना जरूर करना पड़ा!
7. जो लोग कहते हैं कि साध्वी मनगढ़ंत कहानी कह रही हैं उनके साथ ऐसा अत्याचार नहीं हुआ है तो वह बताएं कि बिना किसी अत्याचार के पूछताछ के दौरान आखिरकार साध्वी प्रज्ञा की रीढ़ की हड्डी कैसे टूट गई उनके फेफड़े की झिल्ली आखिरकार कैसे फट गई.. यह सारे तथ्य उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स से साबित होते हैं!
हिंदू आतंकवाद/ भगवा आतंकवाद की फूलप्रूफ, घिनौनी स्क्रिप्ट लिखने के बावजूद कांग्रेस इसमें कामयाब इसलिए ना हो सकी क्योंकि उसने सोचा था कि महिला होने के नाते साध्वी इतना शारीरिक व मानसिक यंत्रणाएँ सहन नहीं कर पाएँगी और वे अपराध स्वीकार कर लेंगी परंतु अपने तमाम छद्म प्रयासों के बाद भी वे एक साध्वी के आत्मबल, आत्मशक्ति को ना तोड़ सके!
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