Thursday, 16 May 2019

विनाश काले विपरीत बुद्धि

वैसे तो पश्चिम बंगाल का राजनीतिक इतिहास कभी भी शांत और स्थिर नहीं रहा है|

चाहे सीपीआई सीपीआई(एम) या फिर तृणमूल कांग्रेस का शासन काल रहा हो..हमेशा से ही यहाँ का चुनावी इतिहास हिंसक  रक्तरंजित और निंदनीय रहा है!

पर इस बार बंगाल के जैसे हालात हैं इतने निम्न स्तरीय हालात पहले कभी भी नहीं हुए कई वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि पश्चिमी बंगाल में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं जब भी सत्तारूढ़ पार्टी खुद को कमजोर पाती है और कोई नई पार्टी चुनौती देती सी लगती है तो हिंसा होती ही है

तो क्या यह सच मान लिया जाए की ममता बनर्जी को अपनी हार, अपने हाथ से सरकती हुई सत्ता साक्षात् दिखाई दे रही है...? आखिरकार ममता की इस बहदवासी का कारण क्या है???

बहदवासी का आलम तो यह है की जय श्री राम बोलने वाले को हिरासत में ले लिया जाता है|
कार्टून बनाने वाली महिला को जेल में डाल दिया जाता है सुप्रीम कोर्ट की रिहाई के आदेश की अवमानना की जाती है !

आखिर इस तरह की तानाशाही और हड़बड़ाहट में लिए गए ऊल-जलूल निर्णयों के पीछे कारण क्या है?

एक राज्य की सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी हुई महिला संविधान की अवहेलना कैसे कर रही हैं.. और क्यों कर रही है?

कैसे वो कह रही हैं कि मैं भारत के प्रधानमंत्री को प्रधानमंत्री नहीं मानती..?

कैसे वो अमर्यादित, निम्न स्तरीय भाषा का प्रयोग अपनी बौखलाहट में करती जा रही हैं..?

जिन आदर्शों को लेकर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की सीपीआईएम को हटाया उन्हीं के चरणचिन्हों पर आखिर आज वो कैसे चल रही है..?

दरअसल इसका कारण है उनका सत्ता का दंभ और किसी भी तरह सत्ता हथिया लेने का लालच!

जिसके कारण इस वक्त वो हर झूठ-सच, हिंसा या किसी भी तरह के निम्न स्तरीय, अमर्यादित और असंवैधानिक कार्य करने पर उतर आई हैं!
दरअसल साल 2009 से ही पश्चिम बंगाल में बीजेपी का मत प्रतिशत बढ़ना और पंचायत चुनाव में टीएमसी की तमाम गैर कानूनी दखल के बावजूद बीजेपी को मिली सफलता से ममता बनर्जी पागल हो गई हैं और सत्ताच्युत होने की हताशा में अपने ही पांव पर कुल्हाड़ी मार रही हैं !

प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी की रैलियों में बढ़ती भीड़ ने ममता बनर्जी की रातों की नींद उड़ा दी है और उन्हें अपने हाथों से सरकती हुई सत्ता साफ दिखाई दे रही है इसीलिए आजकल वह पूरी तरह से विवेकहीन हो गई हैं!

कल बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के रोड शो के दौरान हुई हिंसा ने बंगाल की राजनीति को बेहद गर्म कर दिया है जानकारों की माने तो यदि बंगाल पुलिस चाहती तो रोड शो के दौरान हुई हिंसा को रोका जा सकता था..पर उनका मानना है कि यह टीएमसी का पूर्व नियोजित कार्यक्रम था... जिसके तहत हिंसा फैलाना विद्यासागर जी की मूर्ति तुड़वाना और उसके बाद जनता में भावनात्मक आक्रोश उत्पन्न करना उनकी मंशा थी!

फिलहाल चुनाव आयोग ने छह चरण में हुई भयानक हिंसा और अमित शाह के रोड शो में हुई हिंसा के बाद पहली बार आर्टिकल 324 के तहत विशेषाधिकारों का इस्तेमाल करते हुए देर से ही सही पर बेहद कठोर व उचित निर्णय लिया है!
जिसका आरोप भी ममता बनर्जी सीधे-सीधे प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर लगा रही हैं.. उन्होंने तो चुनाव आयोग पर भी आरोप लगाते हुए कहा के चुनाव आयोग में सारे संघ के लोग भरे हुए हैं ये सारी बातें ममता बनर्जी के मानसिक दिवालियापन को दर्शाती हैं और कुछ नहीं!

खैर चुनाव आयोग के निर्णय से जहाँ एक ओर 19 घंटे पूर्व ही चुनाव प्रचार थमने से कम से कम हिंसा को कुछ हद तक रोका जा सकेगा वहीं बंगाल के गृह सचिव और एडीजी (सी.आई.डी)को तत्काल प्रभाव से हटाने से चुनाव में निष्पक्षता तो आएगी ही!

बस ममता बनर्जी के लिए सिर्फ इतना ही कहूँगी 'विनाश काले विपरीत बुद्धि!'

Tuesday, 23 April 2019



इस वक्त भारत में चुनाव का माहौल है और सबसे चर्चित प्रत्याशी प्रज्ञा ठाकुर जी है आपको बता दें की प्रज्ञा ठाकुर जी भाजपा प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस के प्रत्याशी दिग्विजय सिंह के समक्ष भोपाल से चुनाव लड़ रही हैं !

भारत में 25 वर्ष की आयु से ऊपर का कोई भी व्यक्ति जो किसी गंभीर आरोप में अदालत द्वारा दोषी करार ना दिया गया हो और सजायाफ्ता ना रहा हो, वो चुनाव लड़ सकता है!
फिर ऐसा क्या हो गया है,इसमें ऐसी क्या विशेष बात है, क्यों कहर बरपा है प्रज्ञा ठाकुर जी के चुनाव लड़ने पर!

आपको बता दें की कांग्रेस के कुछ तथाकथित नामी-गिरामी नेताओं के द्वारा जो हिंदू आतंकवाद या भगवा आतंकवाद की थ्योरी को जन्म दिया गया है उसकी सबसे पहली शिकार प्रज्ञा ठाकुर जी ही हैं

आइए जानते हैं आखिरकार प्रज्ञा ठाकुर जी के ऊपर क्या आरोप लगाए गए हैं और क्यों लगाए गए है..!

महाराष्ट्र के मालेगांव में अंजुमन चौक  और  भीकू चौक  के बीच  29 सितंबर 2008 की रात एक बम धमाका हुआ जिसमें छह लोग मारे गए और करीब 100 लोग घायल हुए थे इसी बम विस्फोट के षडयंत्र रचना के आरोप में महाराष्ट्र एटीएस ने वास्तविकता में 8 अक्टूबर को और 23 अक्टूबर 2008 को (पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार )
साध्वी प्रज्ञा सिंह, कर्नल पुरोहित, अजय राहीरकर, राकेश धावडे और जगदीश म्हात्रे को गिरफ्तार किया गया था!


साध्वी प्रज्ञा ठाकुर जी, जिन्हें सन् 2008 से आजतक लगभग नौ वर्षों तक जेल में अमानवीय यातनाएँ देने के बावजूद अदालत में दोषी साबित नहीं किया जा सका और आखिरकार एन आई ए ने उन्हें क्लीन चिट दे दी है...! ध्यान  देने वाली बात यह भी है कि बीते 9 वर्षों में महाराष्ट्र एटीएस उनके खिलाफ चार्जशीट तक दायर नहीं कर पाई है जबकि 2008 से 2014 तक कांग्रेस का ही शासन काल रहा है!

प्रज्ञा ठाकुर जी इस वक्त बेल पर बाहर है और भोपाल से बीजेपी प्रत्याशी के रूप में लोकसभा का चुनाव लड़ रही हैं!
अब बात आती है मुद्दे की कि उनके चुनाव लड़ने में विपक्षी दलों को तकलीफ क्यों है क्योंकि जहाँ एक तरफ उनकी  हिंदू आतंकवाद/भगवा आतंकवाद थ्योरी फेल हो गई है वहीं दूसरी तरफ उन  हिंदू आतंकवाद और भगवा आतंकवाद के जनक दिग्विजय सिंह को पता है कि अब जनता उनके इन कुकर्मों का हिसाब लेगी और यही कारण है कि दिग्गी की डर के मारे घिग्घी बँध गई है !

आइए इस केस की सच्चाई को तथ्यों के आधार पर जानने का प्रयास करते हैं-

1. प्रज्ञा ठाकुर को 8 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया जबकि पुलिस रिकॉर्ड में  23 अक्टूबर बताया गया है !

2. तेरह दिनों तक पुलिस ने गैरकानूनी रूप से एक काल कोठरी में प्रज्ञा ठाकुर को क्यों रख?

3. किसी भी अपराधी को हिरासत में लेने के बाद 24 घंटे के अंदर अदालत के सामने पेश करना  तथा  48 घंटे के अंदर  मेडिकल करवाना आवश्यक है तो फिर साध्वी के केस में ऐसा क्यों नहीं किया गया क्या यह कानूनन अपराध नहीं है?

4. क्या एक महिला को  जिसका अपराध  9 वर्षों में भी सिद्ध नहीं हो पाया  उसे पुरुष पुलिसकर्मी द्वारा बेल्टों से पीटना शारीरिक वह मानसिक प्रताड़ना देना, अमानवीय अत्याचार करना कानूनन अपराध नहीं है..?

5. हेमंत करकरे दिग्विजय सिंह की निर्देशों का पालन कर रहे थे और उन्हीं के कहने पर उन्होंने साध्वी को बेइंतहा टॉर्चर किया क्योंकि जब हेमंत करकरे महाराष्ट्र एटीएस के अधिकारी थे और जैसा कि दिग्विजय सिंह ने कहा कि करकरे की उनसे  रोज बात होती थी तो यह विचारणीय है कि किस कारणवश  मध्य प्रदेश के दिग्विजय सिंह की महाराष्ट्र के एक आईपीएस अधिकारी से रोज बात हुआ करती थी ?

6. जिन साध्वी पर आतंकवादी हमले के षडयंत्र का आरोप लगाया गया उनका तीन बार नार्को टेस्ट,तीन बार ब्रेन मैपिंग टेस्ट और तीन बार पॉलीग्राफी टेस्ट करवाया गया और फिर भी उन्हें दोषी साबित नहीं कर सके क्योंकि वह दोषी थी ही नहीं..परंतु हाँ इसका एक दुष्परिणाम जरूर हुआ कि इनमें दिए गए केमिकल्स के कारण उन्हें कैंसर जैसी बीमारी का सामना जरूर करना पड़ा!

7. जो लोग कहते हैं कि साध्वी मनगढ़ंत कहानी कह रही हैं उनके साथ ऐसा अत्याचार नहीं हुआ है तो वह बताएं कि बिना किसी अत्याचार के पूछताछ के दौरान आखिरकार साध्वी प्रज्ञा की रीढ़ की हड्डी कैसे टूट गई उनके फेफड़े की झिल्ली आखिरकार कैसे फट गई.. यह सारे तथ्य उनकी मेडिकल रिपोर्ट्स से साबित होते हैं!

हिंदू आतंकवाद/ भगवा आतंकवाद की फूलप्रूफ, घिनौनी स्क्रिप्ट लिखने के बावजूद कांग्रेस इसमें कामयाब इसलिए ना हो सकी क्योंकि उसने सोचा था कि महिला होने के नाते साध्वी इतना शारीरिक व मानसिक यंत्रणाएँ  सहन नहीं कर पाएँगी और वे अपराध स्वीकार कर लेंगी परंतु अपने तमाम छद्म प्रयासों के बाद भी वे एक साध्वी के आत्मबल, आत्मशक्ति को ना तोड़ सके!


Saturday, 20 April 2019

अभिनंदन..!🙏🙏

भाजपा हरियाणा प्रकोष्ठ अपने नए ब्लॉग पर आप सभी का हार्दिक स्वागत करता है..!